चाणक्य नीति
चाणक्यके आदर्श और व्यावहारिक गुणों से संबंधित कुछ खास बातें -
* किसी भी प्रकार की मित्रता के पीछे भी कुछ न कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है।
* अपने रहस्यों को किसी पर भी उजागर मत करो। यह आदत स्वयं के लिए ही घातक सिद्ध होगी।
* जब आपका बच्चा जवानी की दहलीज पर पैर रखें यानी कि सोलह-सत्रह वर्ष का होने लगे तब आप संभल जाए और उसके साथ एक दोस्त की तरह व्यवहार करें। यह बहुत जरूरी है।
* टीनएज बच्चों के साथ हमेशा दोस्ती का व्यवहार करने से वे आपके सबसे अच्छे दोस्त होते हैं।
* अपने ईमान और धर्म बेचकर कर कमाया गया धन अपने किसी काम का नहीं होता। अत: उसका त्याग करें। आपके लिए यही उत्तम है।
* जो लोग हमेशा दूसरों की बुराई करके खुश होते हो। ऐसे लोगों से दूर ही रहें। क्योंकि वे कभी भी आपके साथ धोखा कर सकते है। जो किसी और का ना हुआ वो भला आपका क्या होगा।
* जीवन में पुरानी बातों को भुला देना ही उचित होता है। अत: अपनी गलत बातों को भुलाकर वर्तमान को सुधारते हुए जीना चाहिए।
* जीवन काल में बहुत जरूरी है कि अपने ऊपर आने वाले संकट के लिए कुछ धन हमेशा बचाकर रखें। बुरे समय में यही आपका रक्षाकवच बनेगा।
* किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं।
* अगर कोई व्यक्ति कमजोर है तब भी उसे हर समय अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए
* किसी भी प्रकार की मित्रता के पीछे भी कुछ न कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है।
* अपने रहस्यों को किसी पर भी उजागर मत करो। यह आदत स्वयं के लिए ही घातक सिद्ध होगी।
* जब आपका बच्चा जवानी की दहलीज पर पैर रखें यानी कि सोलह-सत्रह वर्ष का होने लगे तब आप संभल जाए और उसके साथ एक दोस्त की तरह व्यवहार करें। यह बहुत जरूरी है।
* टीनएज बच्चों के साथ हमेशा दोस्ती का व्यवहार करने से वे आपके सबसे अच्छे दोस्त होते हैं।
* अपने ईमान और धर्म बेचकर कर कमाया गया धन अपने किसी काम का नहीं होता। अत: उसका त्याग करें। आपके लिए यही उत्तम है।
* जो लोग हमेशा दूसरों की बुराई करके खुश होते हो। ऐसे लोगों से दूर ही रहें। क्योंकि वे कभी भी आपके साथ धोखा कर सकते है। जो किसी और का ना हुआ वो भला आपका क्या होगा।
* जीवन में पुरानी बातों को भुला देना ही उचित होता है। अत: अपनी गलत बातों को भुलाकर वर्तमान को सुधारते हुए जीना चाहिए।
* जीवन काल में बहुत जरूरी है कि अपने ऊपर आने वाले संकट के लिए कुछ धन हमेशा बचाकर रखें। बुरे समय में यही आपका रक्षाकवच बनेगा।
* किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं।
* अगर कोई व्यक्ति कमजोर है तब भी उसे हर समय अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए
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